माय "कस्तुराई" - प्रा बी एन चौधरी यास्नी माय

🌺lअlभिlष्टlचिंlतlनl🌺
*मायना ८०वा "जनमदिन" :*
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माय "कस्तुराई", ऐंशी वरीसनी झायी, 
धन्य झायी कुडी, "देवरुप"नी पुन्न्यायी. 

वाटे तिन्हा बये, घर "पंढरपूर" वानी
तिन्ही छत्र छाया, करे घर आबादानी,

व्हती संकटमा नाव, किनारे तिन्ही लायी, 
खाईसन खस्ता, आम्हले जग दुन्या दायी. 

आज वय झायं तरी, माय लिखस वाचस, 
भजन म्हन्ता म्हन्ता, जिभे सरसती नाचस. 

आख्खा रात दिन तिन्हं, देव देव देखा चाले, 
ती सांगस, तेन्ही सत्ताबिना, पत्ता नही हाले. 

कधी येस मन भरी, तव्हय जीव हुंबरस, 
भुलीसन आम्हनं वय, माय पोटशे लावस. 

सुख-दुख, धूप-छाव, म्हने येस तसं जास, 
तिन्ह तत्वज्ञान भारी, माय सम सदा ऱ्हास. 

देखीसनी सारं सुख, आनंद मने दाटे. 
बाप जिभाऊ बिगर, घर सुनं सुनं वाटे. 

त्या देवले शे इनंती, आते एव्हढं करीस, 
माय "झोपाया-आंबा", जगो शंभर वरीस. 

© *प्रा.बी.एन.चौधरी.*
     (९४२३४९२५९३)

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